"वो शख्स जो गिरफ्तार है" - कुमार हरीश

वो 
शख्स

जो गिरफ्तार है

मेरे जेहन में

हर दिन बस

यही दुवा मांगता है

कि

मैं उसे आजाद कर दुं

उसे जेहन से निकाल दूं

उससे सारे वास्ते मिटा दूं

पर जेहन नहीं मानता 

आखिर वो बहुत 

करीब है

दिल के 

उसी दिल के 

जो कभी 

उसी ने तोड़ा था।

 

- कुमार हरीश

 

 

Vo Shakhs

Jo Giraphtaar Hai

Mere Jehan Mein

Har Din Bas

Yahi Duva Maangata Hai

Ki

Main Use Aajaad Kar Doon

Use Jehan Se Nikaal Doon

Usase Saare Vaaste Mita Doon

Par Jehan Nahin Manata

Aakhir Vo Bahut

Kareeb Hai

Dil Ke

Usi Dil Ke

Jo Kabhi

Usi Ne Toda Tha.

 

- Kumar Harish

 

 

यह रचना मेरे द्वारा स्वरचित व पूर्णतया मौलिक है I आपके सुझाव व विचार आमंत्रित हैI

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