प्रश्न चिन्ह ? एक प्रेरणादायक कविता ( Prashnchinha? A Motivational Poem )

         

                
 
प्रश्न चिन्ह ?

निराशाओं के झुंड में जब आशा का कोई बादल नजर आता,

तब तक मनुष्य के हाथ से सारा अवसर निकल जाता I


वह बाट जोहता तब तक जब तक कोई किरण नजर न आती,

बस बाट जोहते रहने में ही देर बहुत हो जाती I


पश्चात् अवसर निकलने के अब उसके पास क्या शेष बच पाता,

कल तक था जो मुस्कराता आज वही मुरझाता I


नयनों में जिसके कल तक सारी दुनिया नजर आती,

आज उसी के नयनों से अश्रुधारा गिर जाती I


उसके जीवन ने एक सोच कैसे में सफल ही पाऊंगा,

इस रंगहीन दुनिया में मै कैसे अपने रंग भर पाऊंगा I


यही सोच अब उसे हर पल परेशान किया करती है

दिन तो दिन रात में भी सोने न दिया करती है I


मझधार ने जैसे नैया डोले खाया करती है,

सोच उसकी नज़रों में ऐसे द्रश्य पेश करती है I


उसके मुख पे अब तो केवल प्रश्नचिन्ह दिखते है,

उसके मुख के प्रश्नचिन्ह कई प्रश्न खड़े कर देते है I

 

-         कुमार हरीश

 ब्लॉग: www.thepoetrylove.com

[ ● मेरी रचनाये स्वरचित एवं पूरी तरह मौलिक हैं। आपके सुझाव एवं आशीर्वाद के लिए आभार ● ]

(Image: google)

 


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